महाकाल और RO का पानी....
हमारे बड़े-बुजुर्ग कहते थे कि बालगोपाल की सेवा सबसे कठिन है, लल्ला का बड़ा ध्यान रखना पड़े है। आसान है भोले बाबा पे एक लोटा जल चढ़ा दो। बाबा खुश। लेकिन कहानी में आज नया पेंच फंस गया, अब बाबा साधारण पानी से नहीं मानेंगे। 20 की बॉटल खरीदो, मिनरल पानी की। सर्वोच्च न्यायालय ने कह दिया है। महाकाल को RO का पानी ही चढ़ेगा। मन विचलित है, मेरे महाकाल इतने हाइजिन होंगे अब। जो आदि अघोरी हैं, शमशान के वासी हैं, भस्मरमैया हैं, सुबह से रात तक जो निरंतर जलधारा में रहते हैं, बेलपत्र, आंकड़े के फूल, धतूरा और भांग से ही मस्त हो जाते हैं, उन पर RO का पानी।
मामला RO या साधारण पानी का नहीं है। मेरे महाकाल तो अघोर हैं, सहज हैं, सरल हैं, शांत हैं और निर्लिप्त हैं। जल कौन सा चढ़ाना, इस पर विचार मत करना, RO भी कोई शुद्धता की गारंटी नहीं है। बाबा भाव के भूखे हैं। अगर मंदिर जाओ और आस्था से आंख में एक बूंद पानी भी आ गया दर्शन के समय तो समझ लेना महाकाल ने बिना पानी ही आपका जलाभिषेक स्वीकार कर लिया है। ये सांसारिक पानी तो माया है, महाकाल के भक्त हो तो आंखों से आस्था, सत्य, दया और सद्भाव का पानी मत सूखने देना। रोज जलाभिषेक का पुण्य मिलेगा।
*।।जय श्री महाकाल।